व्यंजन संधि के वस्तुनिष्ठ प्रश्न परिभाषा, प्रकार व नियम | Hindi Vyanjan Sandhi Objective Type Question

Hindi Vyanjan Sandhi Objective Type Question नमस्कार आज इस पोस्ट में व्यंजन संधि के सभी प्रकार के प्रश्नों को हल करेंगे साथ में नोट्स दिए जाएंगे यहां पर Vyanjan Sandhi ke Udaharan दिए जाएंगे साथ ही प्रश्न के माध्यम से Vyanjan Sandhi ke prakar के बारे में बताया जाएगा।

इन प्रश्नों को हल करने के बाद आप जानेंगे कि व्यंजन संधि की पहचान कैसे करें? क्योंकि यहां पर सभी स्टेप के अनुसार प्रश्न दिए गए हैं यह सभी प्रश्न अलग-अलग परीक्षाओं से लिए गए हैं जो सभी प्रकार के परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण होते हैं यह सभी प्रश्न पिछले वर्ष के प्रश्न है और यह प्रश्न बार-बार रिपीट होते हैं अतः यहां पर इन सभी प्रश्नों को जरूर हल करें।

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Hindi Vyanjan Sandhi Objective Type Question

यहां पर वस्तुनिष्ठ प्रश्न MCQ के माध्यम से विस्तार पूर्वक उत्तर बताया जाएगा जिसमें व्यंजन संधि के कितने नियम हैं? इसके परिभाषा और सभी नियम यहां पर बताए जाएंगे तो इन प्रश्नों को विस्तार पूर्वक पढ़ें और देखें नीचे इसका नोट्स दिया गया है पीएफ के रूप में उसे जरूर प्राप्त करें।

1.निम्नलिखित में से किस शब्द में व्यंजन संधि नहीं है?

(a) विस्मरण

(b) अनुसरण

(c) हस्तिदंत

(d) नाविक

उत्तर : (d): दिये गये विकल्पों में ‘नाविक’ शब्द में व्यजंन संधि नहीं होगी। ‘नाविक’ शब्द अयादि संधि का उदाहरण है। इसका संधि विच्छेद होगा- ‘नौ इक’ = नाविक

2.’उद्धार’ का संधि-विच्छेद है –

(a) उद् + हार

(c) उध + हार

(b) उत् + हार

(d) उद्ध + आर

उत्तर : (b) ‘उद्धार’ का संधि विच्छेद उत् + हार होगा। नियम-यदि वर्ग के अंतिम वर्णों को छोड़कर शेष वर्णों के बाद ‘ह’ आए, तो ‘ह’ पूर्व वर्ण के वर्ग का चतुर्थ वर्ण हो जाता है और ‘ह’ के पूर्व वाला वर्ण अपने वर्ग का तृतीय वर्ण हो जाता है।

3.निम्नलिखित प्रश्न में, चार विकल्पों में से, उस विकल्प का चयन करें जो दिए गए शब्द के सही संधि विच्छेद का विकल्प हो।

सदाचार

(a) सदा + आचार

(b) सदा + चार

(c) सद + आचार

(d) सत् + आचार

उत्तर : (d): ‘सदाचार’ शब्द का सन्धि विच्छेद सत् + आचार होगा, इसमें व्यंजन सन्धि है।

नियम जब पहले शब्द का अन्तिम वर्ण क् च् ट्, त्, प् में से कोई एक हो तथा दूसरे शब्द का पहला वर्ण कोई स्वर हो/अन्तस्थ व्यंजन हो/ प्रत्येक वर्ग का तीसरा एवं चौथा वर्ण हो तो पहले शब्द का अन्तिम वर्ण अपने वर्ग का तीसरा वर्ण हो जाता है।

जैसे- दिगम्बर दिक् + अम्बर

उद्घाटन उत् + घाटन

वाक् + ईश वागीश

4.निम्नलिखित प्रश्न में, चार विकल्पों में से, उस विकल्प का चयन करें जो दिए गए शब्द के सही संधि-विच्छेद का विकल्प हो।

संरक्षण

(a) सम् + रक्षण

(c) सं + आरक्षण

(b) संर + क्षण

(d) सं + रक्षण

उत्तर : (a) संरक्षण का संधि विच्छेद सम् + रक्षण होगा। इसमें व्यंजन संधि है। व्यंजन संधि व्यंजन का व्यंजन अथवा किसी स्वर के समीप होने पर जो परिवर्तन होता है, उसे व्यंजन संधि कहते हैं।

5.’तत्पुरुष’ का सही संधि-विच्छेद कौन-सा है?

(a) तत् + पुरुष

(c) तत्य + पुरुष

(b) तद् + पुरुष

(d) तदा + पुरुष

उत्तर : (b) : ‘तत्पुरुष’ का सही संधि विच्छेद होगा-

तद् + पुरुष = तत्पुरुष यह व्यंजन संधि का उदाहरण है। यदि प्रथम पद के अंत में ‘द्’ हो तथा उसके पश्चात् क्, त्, थ्, प्, स् आये तो ‘द्’ के स्थान पर ‘त्’ हो जाता है।

जैसे

उद् कर्ष उत्कर्ष

उद् + कीर्ण उत्कीर्ण

उद् थान उत्थान

6.सन्मार्ग में प्रयुक्त संधि कौन-सी है?

(a) विसर्ग संधि

(b) स्वर

(c) व्यंजन संधि

(d) इनमें से से कोई नहीं

उत्तर : (c) : सन्मार्ग में व्यंजन संधि है। जिसका संधि विग्रह ‘सन्मार्ग = सत् + मार्ग होगा।’ व्यजंन सन्धि का नियम यदि क् च्, ट्, त्, प् के बाद न् या म् आए तो क्, च्, ट्, त्, प् अपने वर्ग के पंचम वर्ण में बदल जाते हैं। जैसे षणमार्ग = षट् + मार्ग

जगन्नाथ = जगत् + नाथ

7.’जगन्नाथ’ शब्द में कौन-सी संधि है?

(a) स्वर

(c) व्यंजन

(b) विसर्ग

(d) इनमें से कोई नहीं

उत्तर : (c) : ‘जगन्नाथ’ शब्द में व्यंजन संधि है। यदि वर्ग का पहला वर्ण (क्, च्, ट्, त्, प्) का मेल किसी अनुनासिक वर्ण (केवल न्, म्) से हो तो उसके स्थान पर पाँचवाँ वर्ण (ड्, ञ, ण, न्, म्) हो जाता है। जैसे- जगत्+ नाथ जगन्नाथ चित् + मय = चिन्मय वाक् + मय = वाङ् मय

8.’विपत् + जाल = विपज्जाल’ में कौन सी संधि है?

(a) स्वर संधि

(b) व्यंजन संधि

(c) वृद्धि संधि

(d) गुण संधि

उत्तर : (b) विपत् + जाल विपज्जाल में ‘व्यंजन संधि’ है। व्यंजन का स्वर या व्यंजन के साथ मेल होने पर जो परिवर्तन होता है, उसे व्यंजन संधि कहते हैं। क्, च्, ट्, त्, प् के बाद किसी वर्ग का तृतीय या चतुर्थ वर्ण आए अथवा य्, र्, लू, व् या कोई स्वर आए तो क्, च्, ट्, त्, प् की जगह अपने ही वर्ग का तीसरा वर्ण हो जाता है। उदाहरण- दिक् + गज = दिग्गज जगत् + ईश जगदीश

9.’सद्धर्म’ का सही संधि-विच्छेद है-

(a) सद् + + धर्म

(b) सद् + अधर्म

(c) स + द्धर्म द्धर्म

(d) सत् + धर्म

उत्तर. (d) : सत् : सत् + धर्म = सद्धर्म। इसमें व्यंजन संधि है। यदि क्, च्, ट्, तु, पू के बाद किसी वर्ग का तृतीय या चतुर्थ वर्ण आए या य, र, ल, व या कोई स्वर आए तो क्, च्, ट्, त्, प् के स्थान पर अपने ही वर्ग का तीसरा वर्ण हो जाता है। जैसे- सत् + वाणी = सद्वाणी, अच् अंत अप् + इंधन अबिंधन। अजंत,

10.’जगदीश’ शब्द में कौन सी संधि है?

(a) स्वर

(c) विसर्ग

(b) व्यंजन

(d) इनमें से कोई नहीं

उत्तर. (b) : ‘जगदीश’ शब्द में व्यंजन संधि है। इसका संधि विच्छेद- जगत् + ईश है। यदि ‘क’ ‘च्’, ‘ट्’, ‘त्’ ‘प्’ के बाद किसी वर्ग का तृतीय या चतुर्थ वर्ण आए या य्, र, ल, व् या कोई स्वर आए, तो ‘क्’ ‘च्’ ‘ट्’ ‘त्’ ‘प्’ के स्थान में अपने ही वर्ग का तीसरा वर्ण हो जाता है। जैसे- सत् + वाणी = सद्वाणी।

11.’उज्ज्वल’ का सही संधि-विच्छेद हैः

(a) उत् + ज्वल

(b) उज् + ज्वल

(c) उज्ज + वल

(d) उजु + ज्वल

उत्तर. (a): ‘उज्ज्वल’ का सही संधि-विच्छेद ‘उत्+ ज्वल’ है। इसमें व्यंजन संधि है। इनके नियमानुसार यदि ‘त्’ या ‘द्’ के बाद ‘ज्’ या ‘झू’ हो तो ‘त्’ या ‘द्’ के स्थान पर ‘ज्’ हो जाता है। जैसे- सत्+ जन = सज्जन

विपद् + जाल = विपज्जाल।

12.’दिगम्बर’ का सही संधि-विच्छेद हैः

(a) दिग + अम्बर

(b) दिग् + अम्बर

(c) दिक + अम्बर

(d) दिक् + अम्बर

उत्तर. (d) : ‘दिगम्बर’ का सही संधि-विच्छेद ‘दिक् + अम्बर’ है। इसमें व्यंजन संधि है। इसके नियमानुसार यदि क्, च्, द, च्, प् के बाद वर्ण का तृतीय अथवा चतुर्थ वर्ण (ग्, घ्, ज, झ, द, ध, ब्, भ्) अथवा य्, र्, ल्, व् अथवा कोई स्वर आये तो क्, च्, ट्, त्, प् के स्थान पर उसी वर्ग का तीसरा अक्षर (ग्, ज्, ड्, दु, ब्) हो जाता है। जैसे- वाक् + ईश = वागीश सत् + आचार = सदाचार सुप + अन्त = सुबन्त

13.’उल्लंघन’ का सही संधि-विच्छेद हैः

(a) उत + लंघन

(b) उत् + लंघन

(c) उल + लंघन

(d) उ + लंघन

उत्तर. (b) : ‘उल्लंघन’ का सही संधि विच्छेद ‘उत् इसमें व्यंजन संधि है। इसके नियमानुसार यदि ‘त्’ या ‘ल्’ हो तो ‘त्’ या ‘द्’ के स्थान पर ‘लू’ हो जाता है। जैसे- तत् + लीन = तल्लीन उत् + लास = उल्लास लंघन’ है। ‘द्’ के बाद

14.’तल्लीन’ में संधि प्रकार है

(a) स्वर संधि

(b) विसर्ग संधि

(c) व्यंजन संधि

(d) इनमें से कोई नहीं

उत्तर. (c) : तत् + लीन (त् + लल्) = तल्लीन में व्यंजन संधि है। व्यंजन के बाद स्वर या व्यंजन आने से जो परिवर्तन होता तो परिवर्तन है, उसे व्यंजन संधि कहते हैं। नियमः यदि ‘त्’ के के बाद यदि ‘ल’ हो तो ‘त्’, ‘ल्’ में बदल जाता है। जैसे उत् + लास उल्लास उत् + लेख = उल्लेख

15.अभिषेक में संधि बताइये

(a) गुण

(c) वृद्धि

(d) दीर्घ

(b) व्यंजन संधि

उत्तर. (b) : अभिषेक में व्यंजन संधि है। इसका विच्छेद अभि + सेक होता है। ‘षत्व’ अर्थात् ‘स्’ का ‘ष्’ इस नियम के अनुसार संधि में ‘स्’ से पहले ‘अ’, ‘आ’ से भिन्न कोई स्वर हो तो ‘स्’ का ‘ष’ हो जाता है।

16.’दिग्गज’ का संधि-विच्छेद क्या है?

(a) दिग् + गज

(b) दिक् + गज

(c) दिः + गज

(d) दिग् + अगज

उत्तर. (b) : ‘दिक् + गज’, ‘दिग्गज’ का उचित संधि विच्छेद है, जो कि व्यंजन संधि के अंतर्गत आता है। इस संधि के नियमानुसार यदि

क्, च्, ट्, त्, प् के बाद किसी वर्ग का तृतीय या चतुर्थ वर्ण आये। या य्, र्, लू, व् या कोई स्वर आये, तो क्, च्, टू, त्, प् के स्थान पर अपने ही वर्ग का तीसरा वर्ण हो जाता है।

17.’उड्डयन’ के संधि-विच्छेद का सही विकल्प कौन-सा है?

(a) उत् + डयन

(c) उच्च + डयन

(b) उड् + डयन

(d) उड + डयन

उत्तर. (a) : व्यंजन संधि के नियमानुसार त् या द् के बाद ‘ट्’ या ‘ड’ हो, तो त्याद् के स्थान पर ‘ड्’ हो जाता है। अतः उड्डयन का ‘उत् + डयन’ सही संधि विच्छेद होगा।

18.’ऋग्वेद’ का संधि-विच्छेद क्या है?

(a) ऋ + वेद

(c) ऋ + गवेद

(b) ऋक् + वेद

(d) ऋग + वेद

उत्तर. (b): ऋग्वेद ऋक् वेद यह व्यंजन संधि का उदाहरण है। यदि क्, च्, ट्, त्, प् के बाद वर्ग का तीसरा-चौथा वर्ण या अन्तस्थ व्यंजन अथवा कोई स्वर आये तो क, चू, ट्, त्, प् अपने ही वर्ग के तीसरे व्यंजन में परिवर्तित हो जाते हैं। व्यंजन संधि के अन्य उदाहरण हैं- सत् + वाणी वाणी = सद्वाणी, दिक् + भ्रम = दिग्भ्रम, षट् यंत्र= षड्यंत्र।

19.’तद्धित’ का सन्धि-विच्छेद क्या है?

(a) तत + धित

(b) तद् + धित

(c) तत् + हित

(d) तद + हित

उत्तर. (c) : ‘तद्धित’ का संधि विच्छेद ‘तत् + हित’ होगा। ‘तद्धित’ शब्द में व्यंजन संधि है। इसमें वर्गों के अंतिम वर्णों को छोड़ शेष वर्णों के बाद ‘ह’ आए, तो ‘ह’ पूर्व वर्ण के वर्ग का चतुर्थ वर्ण में बदल जाता है और ‘ह’ के पूर्व वाला वर्ण अपने वर्ग का तृतीय वर्ण हो जाता है।

जैसे – उत् + हत = उद्धत ।

उत् + हार = उद्धार।

वाक् + हरि = वाग्घरि।

20.’उद्विग्न’ का सन्धि-विच्छेद क्या है?

(a) उद + दिन्न

(b) उत + दिग्न

(c) उत् + विग्न

(d) उत + विन्न

उत्तर. (c) : ‘उत् + विग्न’ ‘उद्विग्न’ का सही संधि विच्छेद है। इसमें व्यंजन संधि है। यदि ‘क’, ‘च्’, ‘ट्’, ‘त्’, ‘प्’ के बाद किसी वर्ग का तृतीय या चतुर्थ वर्ण आए, या य, र, ल, व या कोई स्वर आए तो ‘क’, ‘च्’, ‘ट्’, ‘त्’, ‘प्’ के स्थान पर अपने ही वर्ग का तीसरा वर्ण हो जाता है।

21.’सदानन्द’ का सन्धि विच्छेद कीजिए।

(a) सत् + आनन्द

(b) सत + आनन्द

(c) सद + आनन्द

(d) सदा आनन्द

उत्तर : (a) ‘सदानन्द’ का सही संधि विच्छेद- ‘सत् + आनन्द’ है। इसमें व्यंजन संधि है। इसके नियमानुसार यदि किसी वर्ग के पहले वर्ण (क, चू, ट्, त्, प्) का मेल किसी स्वर अथवा व्यंजन वर्ग के तीसरे वर्ण (ग्, ज्, ड्, द्, ब्) या चौथे वर्ण (घ्, झू, द, ध, भू) अथवा अन्तःस्थ व्यंजन (य्, र्, ल्, व्) से होने पर वर्ग का वर्ण अपने ही वर्ग के तीसरे वर्ण (ग्, ज्, ड्, द्, ब्) में परिवर्तित हो जाता है।

22.निम्नलिखित में से कौन सा व्यंजन संधि का उदाहरण नहीं है?

(a) जगदम्बा

(c) संतोष

(b) विद्यालय

(d) अहंकार

उत्तर : (b) व्यंजन का व्यंजन से अथवा किसी स्वर से मेल होने पर जो परिवर्तन होता है, उसे व्यंजन संधि कहते हैं। जगदम्बा, संतोष तथा अहंकार व्यंजन संधि का उदाहरण है जबकि विद्यालय स्वर संधि का उदाहरण है।

23.कौन-सा व्यंजन संधि नहीं है?

(a) उद्धरण

(c) वाग्जाल

(b) तद्धित

(d) रसायन

उत्तर. (d) : उपर्युक्त विकल्पों में से ‘रसायन’ शब्द में व्यंजन संधि नहीं है।’ रसायन’ में दीर्घ स्वर संधि है जिसका विच्छेद इस प्रकार है- रस + आयन। अन्य तीनों शब्द व्यंजन संधि के उदाहरण हैं। जिनका संधि विच्छेद इस प्रकार है-

उद्धरण = उत् + हरण

तद्धित = तत् + हित

वाग्जाल = वाक् + जाल

24.उच्चारण का संधि-विच्छेद होगा-

(a) उच् + आरण

(b) उतः + चारण

(c) उत् + चारण

(d) उचः + चारण

उत्तर : (c) उच्चारण का संधि विच्छेद ‘उत् चारण’ होगा। इसमें व्यंजन संधि है। जब ‘त्’ के बाद ‘च’ अथवा ‘छ’ हो तो ‘त्’ का ‘च्’ हो जाता है। इसके अन्य उदाहरण हैं- सत् + चरित्र सच्चरित्र, शरत् + चन्द्र = शरच्चन्द्र।

25.निम्न में से कौन सा ‘उच्छ्वास’ का संधि विच्छेद है?

(a) उत् + ‘छ्वास’

(c) उच्छ + वास

(b) उच् + श्वास

(d) उत् + श्वास

उत्तर : (d) ‘उच्छ्वास’ का संधि बिच्छेद उत् + श्वास है। इसमें व्यंजन संधि है। संधि के समय यदि त् के बाद श् आये तो ‘त्’ ‘च्’ में और ‘श्’ ‘छ’ में परिवर्तित हो जाता है।

26.’आच्छादित’ का उचित विच्छेद निम्न में से कौन-सा है?

(a) आत् + छादित

(b) आक् + छादित

(c) आ + छादित

(d) आच् + छादित

उत्तर : (c) आच्छादित = ‘आ + छादित’

यह एक व्यंजन संधि है। किसी भी ह्रस्व स्वर या ‘आ’ का मेल ‘छ’ से होने पर ‘छ’ से पहले ‘च’ जोड़ दिया जाता है। जैसे- स्व + छंद = स्वच्छंद, परि छेद परिच्छेद अनु + छेद = अनुच्छेद, वि + छेद विच्छेद

27.’वाग्जाल’ का संधि विच्छेद होगा –

(a) वाक् + जाल

(b) वाक + जाल

(c) वाग् + जाल

(d) वाग + जाल

उत्तर : (a) ‘वाग्जाल’ का संधि विच्छेद वाक्+ जाल होगा। यदि क्, च्, ट्, त्, प् के बाद किसी वर्ग का तृतीय या चतुर्थ वर्ण आये अथवा य्, र्, ल्, व् अथवा कोई स्वर हो तो, क्, च्, ट्, त्, प् के स्थान पर उसी वर्ग का तीसरा अक्षर (ग्, ज्, ड्, द्, ब्) हो जायेगा। जैसे-

वाक् + ईश = वागीश, वाक् जाल वाग्जाल

दिक् + गज = दिग्गज, अच् + अन्त = अजन्त,

सत् + वाणी = सद्वाणी

28.’दिग्दर्शन’ का सन्धि-विच्छेद होगा –

(a) दिग + दर्शन

(c) दिग् + दर्शन

(b) दिक + दर्शन

(d) दिक् + दर्शन

उत्तर : (d) ‘दिग्दर्शन’ का संधि विच्छेद ‘दिक् + दर्शन’ होगा। इसमें व्यंजन संधि है। व्यंजन से स्वर अथवा व्यंजन के मेल से उत्पन्न विकार को ‘व्यंजन संधि’ कहते हैं। ‘दिग्दर्शन’ में निम्नलिखित नियम के अनुसार संधि हुई है- ‘यदि क्, च्, ट्, त्, प् के बाद किसी वर्ग का तृतीय या चतुर्थ वर्ण आए या य, र, ल, व या कोई स्वर आये तो क, चू, ट्, त्, प् के स्थान पर अपने ही वर्ग का तीसरा वर्ण हो जाता है।’ यहाँ क् के बाद तवर्ग का तीसरा वर्ण (द्) आने के कारण क् ग् में परिवर्तित हो जाता है और दिक् + दर्शन = दिग्दर्शन हो जाता है।

29.’सच्छास्त्र’ का समुचित संधिविच्छेद है-

(a) सच् + छास्त्र

(c) सत् + छास्त्र

(b) सत् + शास्त्र

(d) सच् + शास्त्र

उत्तर : (b) ‘सच्छास्त्र’ का समुचित संधिविच्छेद ‘सत् + शास्त्र’ है। यह व्यंजन संधि का उदाहरण है। जब ‘तू’ के बाद ‘श’ आये तो ‘त्’ का ‘च्’ तथा ‘श’ का ‘छ’ हो जाता है। इसके अन्य

उदाहरण हैं-

उत् + शिष्ट = उच्छिष्ट

उत् + श्रृंखल = उच्छृंखल

उत् + श्वास = उच्छ्वास

30.’अनन्त’ शब्द की सही सन्धि होगी :

(a) अन + अन्त

(c) अ + नन्त

(b) अन् + अन्त

(d) अनन् + त

उत्तर : (b) ‘अनन्त’ शब्द का सही सन्धि विच्छेद अन्+अन्त होगा। इसमें व्यंजन सन्धि होगी क्योंकि इसमें व्यंजन ‘न्’ के पश्चात् स्वर ‘अ’ आया है। व्यंजन ‘न्’ तथा स्वर ‘अ’ के बीच संधि होने पर अनन्त शब्द बना। किसी व्यंजन के साथ अन्य व्यंजन अथवा स्वर के संयोग से उस व्यंजन में जो रूपान्तरण होता है, उसे ‘व्यंजन संधि’ कहते हैं।

31.’संसार’ का सही संधि विच्छेद चुने?

(a) सं + सम्हार

(c) संस् + हर

(b) सन + सार

(d) सम् + सार

उत्तर : (d) ‘संसार’ का सही संधि विच्छेद ‘सम् + सार’ होगा। यह व्यंजन संधि का उदाहरण है। इस संधि के नियमानुसार, यदि ‘म्’ के बाद ‘य्’, ‘र्’, ‘ल्’, ‘व्’ अथवा ‘श्’, ‘ष’, ‘स्’, ‘ह’ हो तो ‘म्’ अनुस्वार में बदल जाता है। जैसे सम् शय संशय

32.सज्जन का संधि विच्छेद क्या है ?

(a) सज + जन

(c) सज्ज + न

(b) सत् + जन

(d) स + ज्जन

उत्तर : (b) ‘सज्जन’ शब्द का संधि विच्छेद ‘सत्+ जन’ होगा। यह व्यंजन संधि का उदाहरण है। ‘त्’ के बाद यदि ‘ज’, हो तो ‘त्’ ‘ज्’ में बदल जाता है। जैसे-जगत्+ जननी जगज्जननी, विषत् + जाल = विषज्जाल

33.’वागीश’ का संधि विच्छेद होगा-

(a) वाग् + ईश

(c) वाग + ईश

(b) वाक् + ईश

(d) वाक् + इश

उत्तर : (b) वाक् + ईश वागीश इसमें व्यंजन संधि है।

34.निम्नलिखित प्रश्न में दिए गए शब्द में प्रयुक्त सन्धि के प्रकार का चयन उसके नीचे दिए गए विकल्प में से कीजिए।

तन्मय

(a) व्यंजन सन्धि

(b) विसर्ग सन्धि

(c) स्वर सन्धि

(d) इनमें से कोई नहीं

उत्तर : (a) ‘संधि’ शब्द का अर्थ है- मेल। दो निकटवर्ती वर्णों के परस्पर मेल से जो विकार (परिवर्तन) होता है, संधि कहलाता है। व्यंजन का व्यंजन अथवा किसी स्वर से मेल होने पर जो परिवर्तन होता है, उसे व्यंजन संधि कहते हैं

अतः तन्मय (तत् + मय) में व्यंजन संधि है।

35.’तच्छरण’ का सही संधि-विच्छेद.. है।

(a) तत् + शरण

(c) तत् + छरण

(b) तत + शरण

(d) तत + छरण

उत्तर : (a) ‘तच्छरण’ का संधि विच्छेद तत् + शरण होगा। यह व्यंजन संधि है- ‘तू’ के बाद यदि ‘श’ हो तो ‘त्’ का ‘च’ और ‘श’ का ‘छ’ हो जाता है।

36.’संग्रहालय’ का सही संधि-विच्छेद……………. है।

(a) सम् + ग्रह+ आलय

(c) सत् + ग्रह + आलय

(b) सम सम ग्रह आलय

(d) सत ग्रह + आलय

उत्तर : (a) ‘संग्रहालय’ का संधि विच्छेद ‘सम्+ ग्रह आलय’ होगा। म् का मेल ‘क’ से ‘म’ तक के किसी भी व्यंजन वर्ग से होने पर ‘म्’ उसी वर्ग के पंचमाक्षर (अनुस्वार) में बदल जाता है जैसे-

सम् + कलन = संकलन/सङ्कलन

सम् + गति = संगति

सम् + ग्रह = संग्रह

संग्रह में आलय प्रत्यय लगाने से संग्रहालय बना है।

37.भगवद्गीता का संधि-विच्छेद है-

(a) भगवद् + गीता

(b) भग + वद् + गीता

(c) भगवत् + गीता

(d) भग + वद्गीता

उत्तर. (c) : भगवद्गीता का संधि-विच्छेद भगवत् गीता होता है। यह व्यंजन संधि के अंतर्गत आता है। जब संधि करते समय व्यंजन के साथ स्वर या किसी व्यंजन के मिलने से जो रूप में परिवर्तन होता है, उसे ही व्यंजन संधि कहते हैं।

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