One Shot Complete Polity Complete Indian Polity प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते समय छात्रों को सबसे बड़ी समस्या दो चीजों से होती है। पहला सिलेबस बहुत बड़ा होता है और दूसरा पढ़ने के लिए समय कम होता है। ऐसे में केवल रटकर पढ़ना सही तरीका नहीं होता। पढ़ाई का सही तरीका यह है कि जानकारी को ऐसे समझा जाए कि वह लंबे समय तक याद रहे और परीक्षा के समय तुरंत याद आ सके।
स्मृति तकनीक या Mnemonic Method एक ऐसी पढ़ाई की रणनीति है जिससे कठिन विषयों को आसानी से याद रखा जा सकता है। इसमें बड़े विषयों या अनुच्छेदों को छोटे शब्दों, संकेतों और आसान ट्रिक्स में बदल दिया जाता है। इससे दिमाग को जानकारी जल्दी याद रहती है और परीक्षा के समय तुरंत याद आ जाती है।
भारतीय संविधान में राष्ट्रपति से जुड़े अनुच्छेद 52 से 61 को याद रखने के लिए एक आसान ट्रिक बनाई गई है।
स्मृति ट्रिक: पकानी कोका दुयो दशम
इस ट्रिक की मदद से सभी अनुच्छेदों को आसानी से याद रखा जा सकता है।
Tricks के मुख्य बिंदु
- प का अर्थ है अनुच्छेद 52 जिसमें बताया गया है कि भारत में एक राष्ट्रपति होगा।
- का का अर्थ है अनुच्छेद 53 जिसमें संघ की कार्यपालिका शक्तियां राष्ट्रपति में निहित होती हैं।
- नी का अर्थ है अनुच्छेद 54 जिसमें राष्ट्रपति के निर्वाचन की व्यवस्था बताई गई है।
- को का अर्थ है अनुच्छेद 55 जिसमें चुनाव की पद्धति यानी समानुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली बताई गई है।
- का का अर्थ है अनुच्छेद 56 जिसमें राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्ष बताया गया है।
- दु का अर्थ है अनुच्छेद 57 जिसमें राष्ट्रपति के पुनर्निर्वाचन की पात्रता बताई गई है।
- यो का अर्थ है अनुच्छेद 58 जिसमें राष्ट्रपति बनने की योग्यता बताई गई है।
- द का अर्थ है अनुच्छेद 59 जिसमें राष्ट्रपति के पद की शर्तें बताई गई हैं।
- श का अर्थ है अनुच्छेद 60 जिसमें राष्ट्रपति की शपथ का प्रावधान है।
- म का अर्थ है अनुच्छेद 61 जिसमें राष्ट्रपति के महाभियोग की प्रक्रिया बताई गई है।
लंबे समय तक याद रखने के लिए कुछ आसान अध्ययन तरीके भी अपनाने चाहिए।
Concept Mapping
कठिन विषयों को आपस में जोड़कर पढ़ना चाहिए। जैसे राष्ट्रपति और राज्यपाल की शक्तियों को साथ पढ़ने से दोनों विषय आसानी से समझ आते हैं।
Quick Revision
हर दिन पढ़े गए विषयों का थोड़ा सा रिवीजन जरूर करना चाहिए। इससे जानकारी लंबे समय तक याद रहती है।
Analytical Thinking
किसी तथ्य को पढ़ने के बाद यह सोचना चाहिए कि अगर यह नियम अलग होता तो क्या परिणाम होते। इससे विषय की समझ गहरी होती है। इन तरीकों से पढ़ाई करने पर तैयारी ज्यादा मजबूत होती है और परीक्षा में अच्छे अंक लाने में मदद मिलती है।
Federal Executive in India (भारत की संघीय कार्यपालिका)
भारतीय संविधान के भाग 5 में संघीय कार्यपालिका का वर्णन किया गया है। यह अनुच्छेद 52 से 78 तक फैला हुआ है। किसी भी लोकतांत्रिक देश में कार्यपालिका का काम कानूनों को लागू करना और प्रशासन को सही तरीके से चलाना होता है।
भारत ने संसदीय शासन प्रणाली को अपनाया है। इस व्यवस्था में राष्ट्रपति देश के संवैधानिक प्रमुख होते हैं लेकिन वास्तविक प्रशासन प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद चलाते हैं।
संघीय कार्यपालिका के मुख्य भाग निम्नलिखित हैं।
- राष्ट्रपति
- उपराष्ट्रपति
- प्रधानमंत्री
- मंत्रिपरिषद
- महान्यायवादी
संविधान के अनुसार भारत सरकार की सभी कार्यपालिका कार्यवाही राष्ट्रपति के नाम से की जाती है लेकिन निर्णय प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद की सलाह पर लिए जाते हैं।
President of India (भारत के राष्ट्रपति)
भारत का राष्ट्रपति देश का सर्वोच्च संवैधानिक पद होता है। उसे भारत का प्रथम नागरिक भी कहा जाता है। राष्ट्रपति देश की एकता, अखंडता और संविधान की रक्षा का प्रतीक माना जाता है।
राष्ट्रपति बनने के लिए कुछ महत्वपूर्ण योग्यताएँ निर्धारित की गई हैं।
- राष्ट्रपति बनने की योग्यता
- उम्मीदवार भारत का नागरिक होना चाहिए।
- उसकी आयु कम से कम 35 वर्ष होनी चाहिए।
- उसे लोकसभा सदस्य बनने की योग्यता होनी चाहिए।
- वह किसी लाभ के पद पर कार्यरत नहीं होना चाहिए।
- राष्ट्रपति का चुनाव सीधे जनता द्वारा नहीं किया जाता बल्कि एक विशेष निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है।
- निर्वाचक मंडल में शामिल सदस्य
- संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य
- राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य
- दिल्ली और पुदुचेरी की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य
राष्ट्रपति का चुनाव समानुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली और एकल संक्रमणीय मत पद्धति के आधार पर किया जाता है।
Tenure and Impeachment of President (कार्यकाल और महाभियोग)
भारत के राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है। वह दोबारा चुनाव लड़ सकता है और राष्ट्रपति बनने की संख्या पर कोई सीमा नहीं है।
- राष्ट्रपति पद की शपथ भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा दिलाई जाती है।
- यदि राष्ट्रपति संविधान का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
- महाभियोग की मुख्य प्रक्रिया
- प्रस्ताव लाने से पहले कम से कम 14 दिन का नोटिस देना होता है।
- नोटिस पर सदन के एक चौथाई सदस्यों के हस्ताक्षर होने चाहिए।
- दोनों सदनों में दो तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पारित होना चाहिए।
- यदि यह प्रक्रिया पूरी हो जाती है तो राष्ट्रपति को पद से हटाया जा सकता है।
Powers of the President (राष्ट्रपति की शक्तियाँ)
राष्ट्रपति के पास कई महत्वपूर्ण संवैधानिक शक्तियाँ होती हैं। ये शक्तियाँ देश के प्रशासन को सुचारु रूप से चलाने में मदद करती हैं।
कार्यकारी शक्तियाँ
राष्ट्रपति प्रधानमंत्री, राज्यपाल, महान्यायवादी, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक और अन्य महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति करता है।
विधायी शक्तियाँ
राष्ट्रपति संसद का सत्र बुला सकता है और संसद द्वारा पारित विधेयकों को मंजूरी देता है।
अध्यादेश शक्ति
जब संसद का सत्र नहीं चल रहा होता है तब राष्ट्रपति अध्यादेश जारी कर सकता है।
क्षमादान शक्ति
राष्ट्रपति दोषियों की सजा को कम कर सकता है, बदल सकता है या कुछ मामलों में माफ कर सकता है।
वीटो शक्ति
राष्ट्रपति किसी विधेयक को अस्वीकार कर सकता है या उसे पुनर्विचार के लिए वापस भेज सकता है।
Vice President of India (भारत के उपराष्ट्रपति)
भारत का उपराष्ट्रपति देश का दूसरा सबसे बड़ा संवैधानिक पद होता है। इसका मुख्य कार्य राज्यसभा के सभापति के रूप में कार्य करना है।
- उपराष्ट्रपति की मुख्य भूमिकाएँ
- राज्यसभा का पदेन सभापति होना
- राज्यसभा की बैठकों का संचालन करना
- मत बराबर होने पर निर्णायक मत देना
- राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में कार्यवाहक राष्ट्रपति बनना
- उपराष्ट्रपति राज्यसभा का सदस्य नहीं होता इसलिए वह सामान्य मतदान में भाग नहीं लेता।
Prime Minister and Council of Ministers (प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद)
भारतीय शासन प्रणाली में प्रधानमंत्री सबसे शक्तिशाली पद माना जाता है। प्रधानमंत्री सरकार का वास्तविक प्रमुख होता है और वही पूरे प्रशासन का नेतृत्व करता है।
- राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की नियुक्ति करता है लेकिन सामान्य रूप से लोकसभा में बहुमत प्राप्त दल के नेता को ही प्रधानमंत्री बनाया जाता है।
- प्रधानमंत्री की सलाह पर ही अन्य मंत्रियों की नियुक्ति की जाती है।
- मंत्रिपरिषद की मुख्य विशेषताएँ
- मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है।
- यदि लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पारित हो जाए तो पूरी सरकार को इस्तीफा देना पड़ता है।
- संविधान के 91वें संशोधन के अनुसार मंत्रिपरिषद का आकार लोकसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता।
Important Exam Points (परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य)
प्रतियोगी परीक्षाओं में कुछ तथ्य बार-बार पूछे जाते हैं इसलिए उन्हें विशेष रूप से याद रखना चाहिए।
महत्वपूर्ण बिंदु
- राष्ट्रपति पुनर्निर्वाचन के लिए पात्र होता है और इसकी कोई सीमा नहीं है।
- राष्ट्रपति के चुनाव में केवल निर्वाचित सदस्य भाग लेते हैं।
- महाभियोग की प्रक्रिया में मनोनीत सदस्य भी भाग लेते हैं।
- उपराष्ट्रपति के चुनाव में संसद के सभी सदस्य मतदान करते हैं।
- मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है।
भारतीय संसद से जुड़े महत्वपूर्ण अनुच्छेद 79, 80 और 81 को याद रखने के लिए एक आसान ट्रिक बनाई जा सकती है।
सरल ट्रिक
सरल
- स का अर्थ है संसद का गठन जो अनुच्छेद 79 में बताया गया है।
- र का अर्थ है राज्यसभा की संरचना जो अनुच्छेद 80 में दी गई है।
- ल का अर्थ है लोकसभा की संरचना जो अनुच्छेद 81 में दी गई है।
इस तरह एक ही शब्द की मदद से तीन महत्वपूर्ण अनुच्छेद आसानी से याद रखे जा सकते हैं। पढ़ाई को लंबे समय तक याद रखने के लिए कुछ आसान तरीके अपनाने चाहिए।
Visualization Method
जब भी संसद पढ़ें तो मन में संसद भवन की कल्पना करें। पहले पूरी संसद फिर राज्यसभा और फिर लोकसभा की कल्पना करने से क्रम आसानी से याद रहता है।
Quick Recall Method
हर अध्याय पढ़ने के बाद दो मिनट के लिए आंख बंद करके मुख्य बिंदुओं को याद करें। इससे दिमाग में जानकारी मजबूत होती है।
Keyword Strategy
लंबे शब्दों को छोटे शब्दों में बदलकर याद करना चाहिए। जैसे समानुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली को केवल STV प्रणाली के रूप में याद रखा जा सकता है।
Federal Parliament of India (भारतीय संघीय संसद)
भारत में संसद देश की सर्वोच्च विधायी संस्था है। संसद का मुख्य कार्य कानून बनाना और देश के शासन को दिशा देना होता है। भारतीय संविधान के भाग 5 में संसद का वर्णन किया गया है। अनुच्छेद 79 से 122 तक संसद के गठन और कार्यों के बारे में जानकारी दी गई है।
अनुच्छेद 79 के अनुसार भारत की संसद तीन अंगों से मिलकर बनती है।
संसद के मुख्य अंग
- राष्ट्रपति
- राज्यसभा
- लोकसभा
राष्ट्रपति संसद का सदस्य नहीं होता लेकिन वह संसद का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है क्योंकि किसी भी विधेयक को कानून बनने के लिए राष्ट्रपति की स्वीकृति आवश्यक होती है।
अनुच्छेद 122 के अनुसार संसद की कार्यवाही को सामान्य रूप से किसी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती। यह व्यवस्था शक्ति के पृथक्करण के सिद्धांत को मजबूत बनाती है।
महत्वपूर्ण बिंदु
- अनुच्छेद 79 संसद की संरचना बताता है।
- अनुच्छेद 122 संसद की कार्यवाही की वैधता से संबंधित है।
- भारत में द्विसदनीय संसद प्रणाली है।
Rajya Sabha Structure (राज्यसभा की संरचना)
राज्यसभा को संसद का उच्च सदन कहा जाता है। इसे राज्यों की परिषद भी कहा जाता है क्योंकि इसमें राज्यों का प्रतिनिधित्व होता है। यह भारतीय संघीय व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण भाग है।
- राज्यसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 250 हो सकती है। वर्तमान में इसकी कुल सदस्य संख्या 245 है।
- सदस्यों का विभाजन इस प्रकार है।
- 233 सदस्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से निर्वाचित होते हैं।
12 सदस्यों को राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किया जाता है। - मनोनीत सदस्य कला, साहित्य, विज्ञान और समाज सेवा के क्षेत्र में विशेष योगदान देने वाले लोगों में से चुने जाते हैं।
- राज्यसभा के सदस्य राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा चुने जाते हैं। चुनाव की प्रक्रिया समानुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली और एकल संक्रमणीय मत प्रणाली के आधार पर होती है।
राज्यसभा की महत्वपूर्ण विशेषताएं
- राज्यसभा एक स्थायी सदन है।
- यह कभी भंग नहीं होती।
- इसके सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष होता है।
- हर 2 वर्ष में एक तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त हो जाते हैं।
राज्यसभा के पदेन सभापति भारत के उपराष्ट्रपति होते हैं। उनके अलावा सदन में एक उपसभापति भी होता है जो सदन का सदस्य होता है।
राज्यसभा की विशेष शक्तियां
- अनुच्छेद 249 के अनुसार राज्यसभा राज्य सूची के विषय को राष्ट्रीय महत्व घोषित कर सकती है।
- अनुच्छेद 312 के अनुसार राज्यसभा नई अखिल भारतीय सेवाओं के गठन की अनुमति दे सकती है।
Lok Sabha Structure (लोकसभा की संरचना)
लोकसभा को संसद का निम्न सदन कहा जाता है। इसे जनता का सदन भी कहा जाता है क्योंकि इसके सदस्य सीधे जनता द्वारा चुने जाते हैं। लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 550 हो सकती है। वर्तमान में लोकसभा में 543 सदस्य हैं।
महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधन
- 61वां संविधान संशोधन 1989 के द्वारा मतदान की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी गई।
- 104वां संविधान संशोधन 2020 के द्वारा आंग्ल भारतीय समुदाय के नामांकन की व्यवस्था समाप्त कर दी गई।
- लोकसभा के सदस्य सीधे जनता द्वारा चुने जाते हैं। इसके लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 25 वर्ष होनी चाहिए।
- लोकसभा का सामान्य कार्यकाल 5 वर्ष होता है लेकिन आपातकाल की स्थिति में इसे 1 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है।
लोकसभा की विशेष शक्तियां
- धन विधेयक केवल लोकसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है।
- राज्यसभा धन विधेयक को केवल 14 दिन तक रोक सकती है।
- मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है।
- लोकसभा का अध्यक्ष सदन की कार्यवाही का संचालन करता है और अनुशासन बनाए रखने का कार्य करता है।
Parliamentary Procedures (संसदीय कार्यप्रणाली)
संसद में कानून बनाने की एक निश्चित प्रक्रिया होती है। इस प्रक्रिया के माध्यम से विधेयक कानून बनता है।
- विधेयक बनने की प्रक्रिया
- प्रथम वाचन जिसमें विधेयक प्रस्तुत किया जाता है।
- द्वितीय वाचन जिसमें विधेयक पर विस्तृत चर्चा होती है।
- तृतीय वाचन जिसमें मतदान किया जाता है।
- इसके बाद विधेयक दूसरे सदन में भेजा जाता है।
- दोनों सदनों से पारित होने के बाद विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा जाता है।
- यदि दोनों सदनों में किसी साधारण विधेयक पर मतभेद हो जाए तो संयुक्त अधिवेशन बुलाया जा सकता है।
- संयुक्त अधिवेशन की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करते हैं।
- गणपूर्ति का अर्थ है कि सदन की बैठक चलाने के लिए न्यूनतम सदस्यों की उपस्थिति होना आवश्यक है।
- संविधान के अनुसार कुल सदस्यों का एक दसवां भाग उपस्थित होना चाहिए।
New Parliament Building (नया संसद भवन)
- भारत में नया संसद भवन आधुनिक भारत की पहचान बन चुका है। यह भवन सेंट्रल विस्टा परियोजना के अंतर्गत बनाया गया है।
- इस भवन का आकार त्रिकोणीय है और इसे आधुनिक तकनीक के साथ डिजाइन किया गया है।
- नए संसद भवन के मुख्य तथ्य
- लोकसभा कक्ष की थीम राष्ट्रीय पक्षी मोर पर आधारित है।
- राज्यसभा कक्ष की थीम राष्ट्रीय पुष्प कमल पर आधारित है।
- सेंट्रल लाउंज की थीम राष्ट्रीय वृक्ष बरगद पर आधारित है।
- नए भवन में लोकसभा की 888 सीटें और राज्यसभा की 384 सीटें बनाई गई हैं।
- इस भवन में तीन मुख्य द्वार बनाए गए हैं जिनके नाम ज्ञान द्वार, शक्ति द्वार और कर्म द्वार हैं।
Important Exam Points One Shot Complete Polity Complete Indian Polity
- राज्यसभा का गठन पहली बार 3 अप्रैल 1952 को हुआ था।
- राज्यसभा एक स्थायी सदन है और इसे भंग नहीं किया जा सकता।
- लोकसभा का कार्यकाल सामान्य रूप से 5 वर्ष होता है।
- गणपूर्ति के लिए कुल सदस्यों का एक दसवां भाग उपस्थित होना जरूरी है।
- संयुक्त अधिवेशन की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करते हैं।
